एक कसक

जिंदगी तमाम गुज़र गई
तेरे प्यार में हर रात गुज़र गई
अब बैठे हैं उम्र के उस कगार पर
जहाँ तेरी याद की कसार रह गई
ना तू हा ना तेरा साथ है
दूर दूर तक बस तन्हाई का साया है
ना जाने ज़िंदगी की राह में
किस मुकाम पर तू चली गई
राह तकते रह गए हम यूँही
कि जिंदगी तमाम गुज़र गई
तेरी राह तकते हुए जाने जाँ
जिंदगी की हर रात गुज़र गई
सोचते हैं अब हम बैठे यूँ तन्हाँ
कि हमारी क्या खता गवार कर गयी
कि तेरा प्यार तो नसीब ना हुआ
तेरी रूह भी साथ छोड़ गई

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