कभी आइये मेरे गाँव में

शोर पायल की झंकार का
हाथों में खनकती चूड़ियों का 
साँसों में महकते गजरे का 
कहीं आपको ढूँढना है तो 
आइये कभी मेरे गाँव में 

खिला बचपन जिन कलियों में
लड़कपन बीता जिन गलियों में 
खेले लुकाछिपी जिन दालानों में 
मिले कंचे जहां खदानों से 
देखना है तो आइए मेरे गाँव में 

वो खिलखिलाता सा सूरज 
वो चहचहाते से पंछी
वो महकता सा बाग़ान
वो गदराये से पेड़ कहीं देखना है 
तो आइए मेरे गाँव में 

मदमस्त सा हर मौसम देखना है 
तो आइए मेरे गाँव में 
झुमती बहार देखना है तो 
आइये मेरे गाँव में 
जीवन का आनंद लेना है तो
कभी आइये मेरे गाँव में

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