मुलाक़ात

मुलाकातों का सिलसिला तो इस कदर ही होता है
मिल कर भी ना मिलना अपना नसीब होता है
बातों के सिलसिले में जब जिक्र उनका होता है
तो उनसे मुलाकात को, दिल और भी बेचैन होता है||

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