आंसुओं की दास्ताँ न पूछ मुझसे
कि आंसू तो यूँही निकल पड़ते हैं
थामना भी चाहूँ इन्हें
मगर तेरी याद में बह निकलते हैं
4 thoughts on “दास्तान आंसुओं की”
Comments are closed.
Words are Reflection of Soul
आंसुओं की दास्ताँ न पूछ मुझसे
कि आंसू तो यूँही निकल पड़ते हैं
थामना भी चाहूँ इन्हें
मगर तेरी याद में बह निकलते हैं
Comments are closed.
Wah! ustad, Wah!
IS VERY GOOD..............................
वैभव – धन्यवाद 🙂
許百美 Thanks