जिंदगी अक्स में गर गुजरती
गर अपने होंठो पर सजाना है तो खुदा कि इबादत को सजागर कुछ गुनगुनाना है तो जिंदगी के नगमें गुनगुनाकि ये सफर नहीं किसी सिफार कि कगार काजानिब ये है अक्स तेरी ही शक्शियत काजिंदगी का मानिब समझ ऐ राहगुज़रकि राह में थक कर मंजीलें नहीं मिलतीसमझ बस इतना लीजे ऐ खुदा के बंदेकि यादों … Read more