दर्द-ऐ-दिल

कि अभी तो हुई शुरू बात दिल कि हैऔर अभी तुम जाते होकि अभी तो नासूर–ऐ–दिल को छेड़ा हैऔर तुम जाते होकि अभी तो खून–ऐ–जिगर बाकी हैऔर तुम जाते हो ऐ दोस्त जुल्म यूँ न करन हो गर हिम्मत–ऐ–नज़र छेड के दास्ताँ–ऐ–जिगर हमें यूँ बेजार न कर Share on FacebookTweetSave

भारतवर्ष का राष्ट्रीय गीत – वंदे मातरम

स्वतंत्रता दिवस के स्वागतोप्लाक्ष्य पर मैं भारतवर्ष के राष्ट्रीय गीत के हिन्दी रूपांतरण पर ये लेख लिख रहा हूँ| भारतवर्ष का राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम” श्री बंकिम चंद्र चटोपाध्याय ने संस्कृत में लिखा था एवं श्री अरबिंदो ने उसे अंग्रेजी में अनुवादित किया था| वंदे मातरम – संस्कृत रूप में सुजलाम सुफलाम, मलयज शीतलं शाश्यश्यामालम … Read more

गर तुम पिलाओ मदिरा

गर तू अपने होंठों से मदिरा पिलाए तो मैं पी लूँकि तेरे हाथों से में बहुत मदिरा पी चुकागर तू अपने लबों से पिलाए तो मैं पी लूँकि तेरी आखों से मैं बहुत पी चुकागर भर अधर का प्याला पिलाए तो मैं पी लूँकि तेरे केसुओं की लटों से मैं बहुत पी चुकाऐ साकी गर … Read more

FW: Appraisal Time

Well a real nicely done up geeta pravachan for those who feel bad about their Appraisals Mayank – हे पार्थ !! (कर्मचारी), इनक्रीमेंट/ अच्छा नहीं हुआ, बुरा हुआ…. इनसेंटिव नहीं मिला, ये भी बुरा हुआ… वेतन में कटौती हो रही है बुरा हो रहा है, ….. तुम पिछले इनसेंटिव ना मिलने का पश्चाताप ना करो, … Read more